आजमगढ़। जिला अस्पताल में दो माॅर्च्युरी है। जिसमें पोस्टमार्टम के लिए आने वाले शवों को रखा जाता है। वर्तमान में अगर पोस्टमार्टम कराना है तो यहां पर तैनात कर्मियों को 500 रुपये और देशी शराब की पांच शीशी भेंट करनी पड़ती है। इसके बाद ही उनके द्वारा शवों को सील किया जाता है।मंडलीय जिला चिकित्सालय परिसर में वर्तमान में दो माॅर्च्युरी हैं। जिसमें एक माॅर्च्युरी की चाबी बलरामपुर पुलिस चौकी के पास रहती है। जो देर रात हुई दुर्घटना के शवों को रखने के काम में आती है। वहीं दूसरी माॅर्च्युरी आधुनिक है। जिसमें छह डीप फ्रीजर लगे हैं। जिसमें शवों को रखा जाता है। वर्तमान में सभी डीप फ्रीजर पूरी तरह से ठीक हैं। लेकिन वहीं एक माॅर्च्युरी जिसकी चाभी बलरामपुर चौकी के पास रहती है। उसकी हालत काफी खस्ता है। बरसात होने पर इसकी छत टपकती है। छत का प्लास्टर टूटकर गिरता है। इसमें प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है।
पोस्टमार्टम कार्य अपराह्न दो बजे से शुरू होकर पांच बजे तक चलता है। इसके बाद अगर किसी का पोस्टमार्टम करना है तो उसके लिए डीएम के आदेश की जरूरत होती है। वहीं पोस्टमार्टम कराने के लिए यहां तैनात कर्मियों को 500 रुपये और पांच देशी शराब की शीशी भेंट करनी पड़ती है।
शव पर पानी टपकते और चूहों द्वारा शव को कुतरे जाने का वीडियो हुआ था वायरल
आजमगढ़। पुलिस द्वारा दुर्घटना में मृत हुए लोगों के शवों को जिस माॅर्च्युरी में रखा जाता है। उसकी हालत काफी दयनीय है। लगभग तीन माह पूर्व 22 मई को पुलिस द्वारा रखे एक शव के ऊपर बारिश का पानी टपकते हुए मिला था। इतना ही नहीं चूहों द्वारा उसके पैर की अंगुलियों को भी कुतरा गया था।
शासन का निर्देश तो 24 घंटे पोस्टमार्टम का है लेकिन आर्टीफिशियल लाइट में पोस्टमार्टम में कुछ चीजे स्पष्ट नहीं हो पाती हैं। इसलिए दिन ही पोस्टमार्टम किया जाता है। इसके बाद विषम परिस्थितियों में डीएम की अनुमति लेकर पोस्टमार्टम किया जाता है। रही बात कर्मचारियों के लोगों से वसूली की तो मैं इसे देखता हूं। अगर ऐसा है तो यह गलत है। जर्जर माॅर्च्युरी को लेकर भी एसआईसी से बात करके मरम्मत कराई जाएगी।
डा. अशोक कुमार, सीएमओ
