आजमगढ़। जनपद में हाई रिस्क श्रेणी में नौ महीने से गर्भवती 3794 महिलाओं में खून की कमी पाई गई। इनमें हीमोग्लोबिन सात से कम पाया गया है। इनमें महकमे द्वारा 3547 एनीमिया ग्रस्त महिलाओं का तो इलाज किया गया, लेकिन, 247 महिलाएं ऐसी रहीं जिनका उपचार विभाग ने नहीं किया। इस वजह से प्रसव के दौरान नौ महीनों में 50 गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई।

गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को दूर करने और प्रसव के दौरान होने वाली मौत को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत योजन चल रही है। इसके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन और प्रसव के बाद गोलियां दी जाती हैं।दरअसल, गर्भवती महिलाओं में से 15 प्रतिशत महिलाओं में जटिलता की संभावना होती है, इस वजह से मातृ-मृत्यु की संभावना भी अधिक होती है। ऐसे में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण व फॉलोअप कर उनकी सेहत का ख्याल रखने का आदेश है।

 

आजमगढ़ में अप्रैल से दिसंबर तक 1,02,672 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई, इसमें 3794 महिलाओं में हीमोग्लोबिन सात से भी कम पाया गया। इस कारण इन्हें हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित किया गया।

बिलरियागंज और हरैया में एनीमिया से पीड़ित ज्यादा : स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे अधिक एनीमिया पीड़ित महिलाएं हरैया 314 और बिलरियागंज में 300 मिलीं। वहीं अगर सबसे कम एनीमिया पीड़ित महिलाएं कोयलसा में 89 और जिला महिला अस्पताल में 23 मिलीं।

वहीं, अगर डिलीवरी के दौरान मौत के आंकड़े पर गौर करें तो शहरी क्षेत्र को छोड़कर हर ब्लॉक में मौतें हुई हैं। इनमें सबसे आगे तरवां और कोयलसा में चार-चार मौतें हुई हैं।

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