संवाददाता राजकुमार गुप्ता
समाजिक संगठन अशोक सेवा संस्थान ने आज जिलाधिकारी महोदय को अपना ज्ञापन सौंपकर बोधगया बौद्ध महाविहार को ब्राह्मणों से मुक्त कराने के लिए अपने ज्ञापन को रखा ज्ञापन में महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 ब्राह्मणों द्वारा बनाकर महाबोधि टेंपल पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया गया जिसमें समक्ष बौद्ध अनुयायियों तथा बौद्ध भिक्खूगण की भावनाएं आहत हो रही है महाबोधि टेंपल एक्ट 1949 में संशोधन कर महाबोधि महाविहार के संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु बनी समिति के सारे सदस्य बौद्ध भिक्षुगण को ही रखा जाए यह महाबोधि बौद्ध महाविहार विश्व बौद्ध अनुवाइयों की धरोहर है यह सवाल उठ रहा है कि महा बिहार परिषद में शिवलिंग कैसे स्थापित हुआ? परंतु सन 1895 के अनागरिक धम्मपाल बनाम महंत के केस में आए जजमेंट से सिद्ध हुआ है परंतु इस जजमेंट के बावजूद भी मुख्य बुद्ध विहार के बगल में शिवलिंग की स्थापना करना तथा बुद्ध विहार की दीवारों पर पांडवों का जिक्र करना विश्व धरोहर का अपमान है यह अशोक सेवा संस्थान अपने ज्ञापन में मांग कर रहा है कि तत्काल महाबोधि परिषद से शिवलिंग हटवाया जाए महाबोधि महाविहार मूलतः बौद्धो का विश्व धरोहर है इसकी पुष्टि फाह्यान एवं हुवेंग सांग चीनी यात्रियों के यात्रा विवरण तथा महाबोधि महाविहार उन खनन रिपोर्ट से होती है। महन्त की कोठी में सैकड़ो भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं शिलालेख और अभिलेख पड़े हैं जो पुरातत्व विभाग को सौंप कर संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाए और यही नहीं महाबोधि महा बिहार परिषद के आस -पास दूसरे धर्मो के लोग लाउडस्पीकर लगाकर वातावरण को खराब कर रहे हैं उसे संज्ञान में लेकर वहां से हटवाया जाए जिससे शांति व्यवस्था बनी रहे इस ज्ञापन के माध्यम से महाबोधि महा बिहार के पास ही धम्मप्रिय चक्रवर्ती सम्राट अशोक का महल था जिसे फ्रांसीस बुकानन में देखा था उसे पुरातत्व विभाग को निर्देशित किया जाए कि उसे ढूंढ कर बोधगया का इतिहास उजागर करें और प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने भगवान बुद्ध की आकृति को गमले आदि जैसे तैयार कर बाजारों में बेच रहे हैं यह भगवान बुद्ध का बहुत बड़ा अपमान हो रहा है और बौद्ध अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है यह संस्था मांग कर रहा है कि ऐसी कंपनियों को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
