महाराजा सुहेलदेव श्रावस्ती के एक महान राजा थे, जो 1034 में बहराइन में गजनवी गाज़ी मिया की हमारा राजा श्रावस्ती के महान सभार बहराइच की निय अधिकारिक वेवसाइट थे। उक्त बमेस्टने और मारने के लिए लोकप्रिय थे की जाति का उल्लेख नहीं कि है और ऐसे शूरवीर क्षत्रियता गुण से मुक्त विभूतियों भी महाराजा बन में बाधना कदापि उचित नही

 

दुर्भाग्य है कि ऐसे महान क्षत्रिय या विभूतियों को किसी जाति पान मध्य राजनैतिक लाभ के लिए जाति सूपकों को प्रयोग करने वालों पर अब योद्धाओं, विभूतियों के नाम के पीछे पाही अमल में नहीं लायी जा सकी है। जिसका लाभ उठाते हुए आये दिन तक किसी भी तरह की कोई कार्यकालदेव के नाम पर जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों द्वारा अपने दिन क्षत्रिय गुण से सम्पन्न महाराजा सुहेलदेव तयों के बाहर सरकारी खर्च और राराराजा सुहेलदेव राजगर जैसे जातिसंज्ञापन क्षेत्रों में स्थित भर जाति कर का निर्माण कराकर जहां वोटरों और विशेष जाति के मन मस्तिष्क में भ्रमका चावक शब्दों के साथ स्मृति को उनके आदर्श कार्यों के लिए नहीं बल्कि जाति के आधार पर याद करने की रिपैदा कर मड़ावा देते हुए समाज को गुमराह कर रहे है।

 

जिसके क्रम में संज्ञान में आया है कि की जस्परा को बदकपुर विकासमा में वर्तमान विधायक द्वारा कई स्मृति द्वार / शीलापट्ट पर महाराजा सुहेलदेव राजगार में मुबाकित किया जा रहा है। वहीं जौनपुर के शाहगंज विधायक द्वारा भी अपने क्षेत्र में महाराजा सुहेलदेव राजमर अंकित कराया जा रहा है जिस पर हमे आपत्ति है। ऐसे जनप्रतिनिधि के कृत्यों से जहां इतिहास को प्रभावित कर रहे वहीं केवल जातिगत रोटी सेंकने के लिए भर समाज को भ्रामक स्थिति पैदा कर रहे है।

उपरोक्त आधार पर हम मांग करते है कि अविलम्ब ऐसे गलत परम्परा पर रोक लगाई जाए साथ ही जो गलत स्मृति द्वार बनाने वाले और उ‌द्घाटन करने वाले जनप्रतिनिधियों को कारण बताओ नोटिस और उनके वेतनमद से उक्त द्वार में खर्च हुए सभी खर्च का समायोजन कराना सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही ऐसा प्रकरण अगर और भी जनपदो में प्रकाश में आये तो उस पर भी विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाए साथ ही अपनी कार्यवाही से पार्टी को भी अवगत कराने का कष्ट करें। जिसमें विवेक सिंह पवन सिंह आशीष सिंह मोनू सिंह रूद्र सिंह ठाकुर शशि प्रकाश MP सिंह बिट्टू

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *