संवाददाता धीरज वर्मा 

आत्मनिर्भरता ही महिलाओं की सुंदरता :दिव्या महिला समान अवसर की हकदार:प्रियंका

मूल्यों का विघटन हुआ है,शिक्षा के साथ दीक्षा नहीं हो रही – प्रो वंदना पाण्डेय

साहित्यानुरागी का विचार गोष्ठी सृजन सम्मान संपन्न

आशा सिंह ममता पंडित का हुआ सम्मान

आजमगढ़। आज की महिला पुरुषों के समान सभी अवसरों की हकदार हैं। अपने

अधिकार समानता और सशक्तिकरण से ही महिला समाज के अग्रिम पंक्ति पर खड़ी है।

यह बातें उपजिलाधिकारी (न्यायिक) बूढ़नपुर श्रीमती दिव्या सिकरवार ने कही। वह प्रतिष्ठित “साहित्यानुरागी संस्था” द्वारा आयोजित महिला दिवस पर विचार गोष्ठी व सृजन सम्मान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद से बोल रही थी। कार्यक्रम सर्वोदय पब्लिक स्कूल हरबंसपुर सिधारी में आयोजित था।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की वास्तविक सुंदरता उनका आत्मनिर्भर होना है। सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा की है। हमारे मूल्य ही मन बुद्धि आत्मा को संतुष्ट करते हैं। समानता के लिए बौद्धिक उन्नयन होना जरूरी है। बौद्धिक उन्नयन शिक्षा से ही होता है।

इस अवसर पर “उपभोक्तावादी संस्कृति में महिलाओं की स्थिति” विषयक विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता सर्वोदय पीजी कालेज मऊ की प्राचार्या प्रो. वंदना पांडेय ने कहा कि मूल्यों का विघटन हुआ है। शिक्षा के साथ दीक्षा नही हो रही है। हर नारी को खुद पर विश्वास होना चाहिए, तभी वह कुछ बड़ा कर सकती है। एक महिला केवल घर नहीं संभालती, वह पूरी दुनिया बदल सकती है। सशक्त महिला वह है जो खुद के फैसले लेने में सक्षम हो। जरूरत है कि महिलाओं को प्रेरित करें, सशक्त बनाएं ताकि सफल बनें और यही महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व करें।

 

विशिष्ट अतिथि उपजिलाधिकारी (न्यायिक) सदर श्रीमती प्रियंका सिंह ने कहा कि महिलाओं का अधिकार मानव अधिकार हैं। साहसी, बहादुर, सुंदर उनकी आवाज़ को सशक्त बनाएं, उनके भविष्य को ऊंचा उठाएं। आज की दुनिया में महिलाएं नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तनकर्ता हैं। वे पुरुषों के समान समान अवसरों की हकदार हैं।

कार्यक्रम की संयोजक “साहित्यानुरागी” की अध्यक्ष डॉ.मनीषा मिश्रा ने कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक मंच के रूप में कार्य करता है। हम महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं।

कार्यक्रम के द्वितीय सोपान में ‘सृजन सम्मान’ के क्रम में शिक्षक व रचनाकार आशा सिंह और रंगकर्मी ममता पंडित को सम्मान पत्र स्मृति चिन्ह और शॉल देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.मालती मिश्रा ने करते हुए कहा कि महिलाओं को दुनिया के अनुकूल बनाने के बारे में मत सोचे,दुनिया को महिलाओं के अनुकूल बनाने के बारे में सोचने की जरूरत है। कार्यक्रम का सफल संचालन अंशू अस्थाना ने किया।

कार्यक्रम का आरंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। आगत अतिथियों को संस्था के तरफ से स्मृति चिन्ह और शाल देकर सम्मानित किया गया। प्राथमिक विद्यालय जाफरपुर की बच्चियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। नारी सशक्तिकरण पर रिद्धि मिश्रा ने एकल नृत्य किया। सरोज यादव और प्रीति वर्मा नारी विषयक कविता से मन मोह लिया।

इस अवसर पर सरोज यादव,विदुषी अस्थाना, शिखा मौर्या, प्रतिभा पाठक,प्रियंका श्रीवास्तव,कंचन मौर्या,राजाराम सिंह, जगदंबा प्रसाद दूबे,अरुण मौर्य,प्रभात बरनवाल अजय गौतम, घनश्याम यादव, जिया फातिमा,रीता यादव,अनीता पूनम सिंह निरुपमा पाठक प्रीति वर्मा,अखिलेश तिवारी, उदिता सिंह ममता राय,सत्यम प्रजापति,विशाल चौरसिया आदि लोग मौजूद रहे।

आजमगढ़। साहित्यानुरागी संस्था ने महिला दिवस पर सृजन सम्मान के क्रम में शिक्षक व रचनाकार आशा सिंह और रंगकर्मी ममता पंडित को सम्मान पत्र स्मृति चिन्ह और शॉल देकर सम्मानित किया गया।

साहित्यकार आशा सिंह अपनी रचनाओं के माध्यम से पत्र पत्रिकाओं और काव्य मंचो पर सशक्त उपस्थिति बनाने वाली शख्सियत है। पुस्तक ‘सिलसिला मुनादी का’ उनकी रचनाशीलता सृजनात्मकता को अलग पहचान देती है।

रंगकर्मी ममता पंडित लब्धप्रतिष्ठित संस्था ‘सूत्रधार’ के अंतर्गत दर्जनों नाटकों में अपने जीवंत अभिनय के जरिये रंगमंच पर हर किरदार को सजीव कर दिया है। रंगमंच के प्रतिष्ठित सम्मान ‘वाग्धारा सम्मान’ सहित अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुकी है।

चित्र परिचय

रंगकर्मी ममता पंडित और रचनाकार आशा सिंह को सम्मानित करती उपजिलाधिकारी (न्यायिक) बूढ़नपुर श्रीमती दिव्या सिकरवार और

उपजिलाधिकारी (न्यायिक) सदर श्रीमती प्रियंका सिंह

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